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naina bhagwati ,नैना भगवती , मणिकर्ण

नैना भगवती मंदिर , मणिकर्ण एक सुंदर मंदिर है । ब्रहमांड पुराण के अनुसार भगवान शंकर व माता पार्वती ने मणिकर्ण के इस सुरम्य एवं अलौकिक स्थान पर 11000 वर्षो तक तपस्या की । जलक्रीडा करते हुए माता पार्वती के कानो के आभूषण की मणि जल में गिर गयी । भगवान शिव के गणो ने भी उसे बहुत ढूंढा पर वो नही मिली । इस पर शंकर जी क्रोधित हो उठे । सारा ब्रहमांड कम्पायमान हो उठा । तब शंकर जी ने अपना तीसरा नेत्र खोला । इस दिव्य नेत्र से शक्ति प्रकट हुई जिसका नाम नैना देवी हुआ । नैना देवी ने ही बताया कि माता भगवती की खोयी हुई मणि पाताल लोक में शेषनाग के पास है । देवताओ के आग्रह पर शेषनाग ने माता पार्वती की मणि एवं अन्य असंख्य मणियां वापिस कर दी । मणि वापिस करने के लिये शेषनाग जी ने फुकार मारी जिससे यहां पर गर्म पानी के फव्वारे फूट पडे । पार्वती जी को मणि मिल गयी जिसके बाद शंकर जी का क्रोध शांत हो गया । इसी से इस स्थान का नाम मणिकर्ण पडा ।




रात के समय लिया गया फोटो नैना भगवती मंदिर का
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ram mandir, manikaran ,राम मंदिर मणिकर्ण

प्राचीन श्री राम मंदिर , मणिकर्ण की देखने लायक जगहो में से है । मंदिर काफी प्राचीन तो है ही पर कुछ और बाते इसे खास बनाती हैं जैसे कि इस मंदिर में रूकने की बहुत ही सुंदर व्यवस्था है । मै भी जब यहां पर आया तो लगभग 4 के करीब का समय था । उस समय से मुझे कमरा देखने के लिये काफी समय था । इसलिये मै राम मंदिर में दर्शन करने चला गया । वहां पर मैने कमरो के बारे में लिखा देखा तो पूछ लिया । कांउटर पर बैठे सज्जन ने बताया कि  कमरो का रेट 200 रूपये है । मैने कमरा देखा वो काफी बडा और साफ सुथरा था । सबसे अच्छी बात थी कि मणिकर्ण की खासियत गर्म पानी के गंधक युक्त चश्मे में नहाने के लिये यहां पर स्नानागार बना हुऐ थे पुरूषो और औरतो के लिये अलग अलग
मैने कमरे में सामान रखा और कमरे में ही कपडे और चप्पल निकालकर मै स्नानागार में चला गया । यहां पर स्नानागार में कपडे या सामान रखने की जगह ज्यादा नही होती । या तो आपके साथ कई लोग हों तो वे आपके सामान की रखवाली कर सकते हैं पर मै तो अकेला था इसलिये मुझे राम मंदिर में कमरा लेना बहुत ही पसंद आया । नहा धोकर मै तरोताजा हो गया । उसके बाद मैने मंदिर में दर्शन किये । मंदिर में लकडी और पत्थर की कारीगरी का अदभुत संगम है । मंदिर की शैली भी सुंदर है और मंदिर का माहौल भी साफ सुथरा है । दर्शन करने के बाद मै निकल पडा मणिकर्ण के अन्य दर्शनीय स्थानो की सैर पर






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manikaran , gurudwara ,मणिकर्ण गुरूद्धारा साहिब



गुरूद्धारा मणिकर्ण साहिब को  गुरूद्धारा श्री गुरू नानक देव जी मणिकर्ण के नाम से भी जाना जाता है । कहा जाता है कि गुरू नानक देव जी अपनी यात्रा के दौरान हिमाचल में भुंतर में बिजली महादेव और मं​डी आदि अन्य जगहो की यात्रा करते हुए मणिकर्ण भी पहुंचे थे ।
जब गुरूनानक जी यहां पर पहुंचे तो उनके साथ भाई बाला और मरदाना भी थे । यहां पर गुरू नानक देव ने चमत्कार किया जिनका जिक्र भाई बाला ने अपनी पुस्तक में किया है । जब वे यहां पर पहुंचे तो उनके पास खाने का राशन तो था पर पकाने का साधन नही था ।  गुरूजी ने उनसे एक पत्थर उठाने को बोला । पत्थर उठाने पर उसके नीचे से खौलते पानी का स्त्रोत निकला । गुरूजी ने अनाज और चावल एक पोटली में करके उसमें डालने को बोला । जैसे ही वे अनाज उस चश्मे में डाले तो वे गायब हो गये । भाई बाला बडे दुखी हुए पर गुरूजी ने उनसे कहा कि वे दुखी ना होंवे बल्कि अरदास करें कि यदि पोटली मिल जायेगी तो वे भगवान नाम की रोटी निकालेंगें । ऐसी अरदास करते ही पोटली मिल गयी । तब से यहां पर इस गुरूद्धारे में ऐसे ही लंगर पकता है 
 कहा जाता है कि गुरू गोविंद सिंह जी ने भी अपने पंज प्यारो के साथ इस स्थान की यात्रा की थी ।
मणिकर्ण को अपने गर्म पानी के स्त्रोतो के लिये भी जाना जाता है । इन गर्म पानी के कुंडो में स्नान करना त्वचा के रोगो के लिये बढिया माना जाता है ।

कुल्लु से 45 किलोमीटर दूर स्थित मणिकर्ण पार्वती घाटी में है । मनाली से मणिकर्ण करीब 70 किलोमीटर दूर है । मणिकर्ण पहुंचने के लिये भुंतर से रास्ता कटता है ।








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back from parashar ,himachal ,पाराशर , हिमाचल से वापसी

पाराशर मंदिर और झील देखने के बाद अब समय था वापसी चलने का । वापसी में रेस्ट हाउस के आगे चलकर एक छोटा सा सुंदर बुग्याल आता है जिसके बारे में मैने आपको पहले भी बताया था । इस बुग्याल के पास ही एक छोटी सी झील भी बनी है पर इसकी किस्मत पाराशर जैसी नही है इसीलिये इस पर कोई नही जाता । मै आपको दिखा रहा हूं कि इस झील के पास भी एक सुंदर सी झौंपडी है और इसकी लोकेशन भी गजब है । ये बुग्याल और झील पाराशर मंदिर से एक किलोमीटर पहले है । बुग्याल में चरवाहे अपनी भेडे चरा रहे थे । सुंदर नजारो को देखते हुए मैने बाइक की टंकी को देखा तो खतरा दिखायी दिया । तेल का मीटर केवल देा डंडे ही दिखा रहा था । असल में कल मंडी में शाम को 200 रूपये का पैट्रोल डलवाया था ये सोचकर कि कहीं सुबह खुला मिला पम्प तो फिर डलवा लूंगा रात को बाहर बाइक खडी होगी किसी ने निकाल लिया तो बेकार पर सुबह मंदिर घूमने के चक्कर में तेल डलवाना याद ही नही रहा और रही सही कसर पूरी कर दी पाराशर के 20 किलोमीटर के खराब रास्ते ने जिस पर बाइक ने शायद ही 20 से उपर का एवरेज दिया होगा । अब मुझे कटोल तक तो पम्प नही मिलना था यानि 25 और भुतर 30 किलोमीटर के लगभग यहां से सो मैने पाराशर से कटोल तक बाइक को बंद करके चलाने की सोची और ऐसे ही लाया मै कटोल तक । कटोल से आगे भुंतर के लिये चढाई शुरू होती है तो वहां अगर 30 का भी एवरेज देगी बाइक तो रिजर्व में भी काम हो जायेगा बस यही सोच लिये चलता रहा








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bhuntar to manikaran ,भुंतर से मणिकर्ण

भुंतर से ​मणिकर्ण वाले रास्ते पर पहले तो बारिश पडने लगी । मैने एक ढाबे पर बाइक रोक ली और वहां पर चाय पी । बारिश कम सी लगी तो मैने अपने बैग से पन्नी निकालकर अपने कमर वाले बैग और बाइक वाले बैग पर बांध ली । इसके बाद मैने अपनी सर्दी की जैकेट जो कि पानी से भी बचाती है उसे पहन लिया । अब हल्की हल्की बारिश की कोई खास परवाह नही थी । रास्ते में कोई नाला नाम की जगह थी जहां से बिजली महादेव के लिये रास्ता जाता है । यहां पर नदी पर नया नया पुल बना था और उसी पुल से बिजली महादेव का रास्ता था पर ये रास्ता नया था और कच्चा था । मैने मणिकरण की बढिया सडक पकडनी ही ठीक समझी ।
मणिकरण के रास्ते में मैने सबसे ज्यादा जो चीज देखी वो थी नदी के दूसरी ओर बसे गांव जो कि हाइवे से दिखते तो पास हैं पर असल में बहुत दूर है क्योंकि वहां पर जाने के लिये पहले तो नदी में नीचे उतरना पडता है ​और फिर चढना । ऐसे में अगर सामान पहुंचाना हो तो और भी दिक्कत है

इसके लिये उन्होने देशी जुगाड टैक्नोलोजी अपनायी हुई है  । लोगो ने अपने अपने गांव में एक इंजन से ट्राली लगायी हुई है । उसमें किराया लिया जाता है करीब 25 ईंट या इतने ही वजन के सामान के लिये 40 रूपये । बंदे का बढिया ध्ंधा और लोगो का फायदा भी । क्योंकि इसी काम के लिये खच्चर वाला 500 रूपये मांगता और समय भी आधा दिन लगता । इन ट्रालियो में कभी कभी लोग भी सवार होकर चले जाते हैं  । एक ट्राली उपर जाती है तो एक नीचे आती है । काफी फास्ट सर्विस है इनकी


कसोल तक तो सडक बढिया थी पर कसोल से आगे सडक की चौडाई घट गयी थी । मणिकरण में जाकर मैने सडक के बराबर में उल्टे हाथ को जिधर नदी बह रही थी उसी साइड में सारा शहर बसा है वहां पर दूसरी तरफ जाने के लिये बस स्टैंड से आगे एक पुल है जो सीधा राम मंदिर को जाता है  । उस पर बाइक भी चली जाती हैं । बाइक को मैने राम मंदिर के बाहर चौक पर खडा किया और राम मंदिर में ही कमरा ले लिया ।

आगे का वृतांत कल भी जारी








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bhuntar city , kullu , Himachal ,भुंतर , हिमाचल

भुंतर ऐतिहासिक कस्बा है । हिमाचल प्रदेश का और मणिकर्ण या कुल्लू मनाली जाने के लिये पहले यही प्रवेश द्धार था । कुल्लू जिले की ये नगर पंचायत एयरपोर्ट होने के लिये ज्यादा फेमस है पर यहां पर काफी हिस्सा प्लेन है और संगम भी है । पानी का बढिया बहाव होने के कारण और अनु​कूल परिस्थतियां होने के कारण यहां पर रिवर राफिटंग भी की जाती है । भुंतर से कुल्लू जाने के लिये बाइपास बना है । इस रास्ते पर जगह जगह आपको रिवर राफटिंग वाले सडक पर मिल जायेंगें । मनाली और मणिकर्ण जाने के लिये रास्ते यहीं से कटते हैं । नदी को पार करके मणिकर्ण वाले रास्ते की ओर चला जा रहा था मै । यहां पर भी आगे जाकर दो रास्ते कटते हैं । एक रास्ता कुल्लू जाने के लिये भुंतर शहर का बाईपास है जो​ कि बहुत ही बढिया और चौडा रास्ता बना है । भुंतर से उल्टे हाथ को बाइपास जाता है और सीधे हाथ को मणिकरण । वैसे जब मैने चौराहे पर पूछा कि बिजली महादेव का रास्ता किधर को है तो उन्होने बताया कि मणिकर्ण वाले रास्ते पर भी एक जगह है जहां से बिजली महादेव के लिये रास्ता जाता है ।





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parashar to bhuntar ,पाराशर से भुंतर , हिमाचल प्रदेश

पाराशर से भुंतर का रास्ता बडा मनमोहक है । अपनी इस बाइक यात्रा के दौरान मैने इस रास्ते में भी काफी सुंदर पक्षी देखे  मुझे अपनी बाइक में तेल कम लग रहा था इसलिये मैने पाराशर झील से कटोल तक ख्रराब रास्ता होते हुए भी बाइक को इंजन बंद करके की चलाया । कटोल से एक किलोमीटर पहले ही रास्ता भुंतर के लिये जाता है । इस रास्ते से मै चल पडा । भुंतर करीब 40 किलोमीटर दूर था और मेरी बाइक अभी रिजर्व में लगने वाली थी यानि की अगर अभी से मानूं तो डेढ लीटर तेल बाइक में था जिससे मै पहाउ का एवरेज तीस का भी मानूं तो भी आराम से जा सकता था पर दिमाग तो परेशान हो ही जाता है इसलिये मै फिर से किसी भी ढालान के आने पर फिर से इंजन बंद कर लेता था । मैने एक दो गांवो में रूककर पूछा भी कि क्या यहां पर खुले में पैट्रोल मिल जाता है पर वो नही था किसी भी गांव में
कटोल से करीब तीस किलोमीटर तक चढायी थी और उसके बाद दस किलोमीटर उतराई । जब उतराई शुरू हुई तो उसके बाद बारिश का मौसम हो गया और हल्की बुंदाबांदी शुरू हो गयी । मेरा भीगने का मन नही था पर मै बारिश की चाल देखता रहा । अगर ज्यादा होती तो मै रूक जाता पर ऐसा नही हुआ और वो केवल बुंदाबांदी होकर रह गयी । भुंतर में मैने पैट्रोल पंप पर तेल भरवाया ।
पैट्रोल पंप का सहायक मुझे देखकर कुछ हैरान सा हो रहा था । पर जब मैने उससे पूछा कि भाई बिजली महादेव किधर को पडेगा तो उसके शक दूर हो गये । हंसकर बोला . घूमने आये हो ?
हां
अकेले ?
हां
कहां से ?
यू पी
बाइक पर ?
इससे पहले उसकी चौडी आंखे और फटने को हो जाती मैने टापिक बदला क्या आप मुझे बिजली महादेव का रास्ता बताओगे ?
हां पर अब बिजली महादेव जाने में रिस्क है  क्योंकि बारिश होने ही वाली लगती है
तो फिर ?
तुम मणिकरण चले जाओ
हम्म
ये तरीका भी सही था अभी दो बजे थे और मणिकरण जाने में बस एक घंटा लग सकता था ज्यादा से ज्यादा तो बाकी टाइम वहां पर रहना और सुबह वहां से निकलकर बिजली महादेव आ जाना । ये भी सही है इसलिये मैने मणिकरण के लिये बाइक चला दी ।

वैसे भुंतर शहर के आसपास कई दर्शनीय स्थान हैं जैसे बिजली महादेव , जगन्नाथ मंदिर , बशेश्वर महादेव मंदिर , चन्द्रखनी पास , आदि ब्रहमा मंदिर और त्रियुगी नारायण मंदिर । ये जगह भुंतर के आसपास ही है और इनके लिये भुंतर को बेस बनाया जा सकता है । 









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around Parashar temple ,पाराशर मंदिर और आस पास

पाराशर मंदिर के चारो ओर का नजारा भी बडा मनमोहक है । पाराशर मंदिर और झील दोनो का एक पैनोरमा व्यू आप देख सकते हो । यहां झील जो है वो चारो और से पहाडियो से घिरी है उसे आप उन पहाडी के उपर चढकर ही देख सकते हो । उस पहाडी के चारो ओर बाड लगायी गयी है जिसमें दो या तीन जगह गेट बनाये गये हैं । गेट ऐसे हैं कि तीन सीढी लोहे की बनी हुई हैं इनके उपर चढकर आदमी अंदर प्रवेश करते हैं । ऐसा क्यों किया गया है इसका यही कारण मुझे समझ में आया कि शायद यहां पर भालू या और कोई जानवर आ जाते होंगें पानी पीने के लिये इसलिये सुरक्षा के लिये ये बाड लगा दी गयी है ।
हिमाचल के लोगो में सिर्फ ग्रामीण ही बलि के अंधविश्वास का शिकार नही हैं बल्कि हर तरह के लोगो में ये फैला हुआ है । इसमें वो लोग हैं जो नीचे कटोल से पैदल यात्रा करके आते हैं तो वो लोग भी हैं जो बढिया लगजरी टैम्पो ट्रैवलर गाडी से यहां पर दर्शन करने आते हैं उनके हाथो में भी एक मेमने की डोर तो रहती ही है ।

अब चलने का समय हो चुका था । कुछ देर मै उपर बनी एक दुकान पर बैठा यहां पर मैगी और चाय के साथ केवल बिस्कुट और नमकीन मिल सकती थी । मैने आते समय कटोल में भी चाय पी थी पर एक बार फिर से यहां पर चाय ले ली । खाना खाने के बारे में मैने अभी सोचा ही नही था अभी तो मेरा ध्यान था कि आज मै कहां तक आगे जा सकता हूं ।
मुझे लगता था कि अभी आधे बचे दिन में मै बिजली महादेव तक पहुंच जाउं तो वहां के दर्शन करके मै कुल्लू या भुंतर में रूक सकता हूं । एक तरीका ये भी था कि मै आज सीधा मणिकर्ण जाकर रूक जाउं । देखते हैं कि आगे क्या होता है






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घुमक्कड़ी पदचिह्न

12 jyotirling 12 ज्योर्तिलिंग 3g 4 dham uttrakhand 4 धाम उत्तराखंड 51 shaktipeeth 51 शक्तिपीठ aali bugyal adi badri agra agra fort ajmer akshardham alexa alexa rank almora amba ji ammora andhra pradesh back water tour badrinath baijnath baijnath mahadev baisakhi fair bali barsana. mathura. vrindavan. up Bedini Bugyal bedini kund bhaguwasa bhakhra dam bharat drashan bharmour bhimkali temple bhimtal Bhubneshwar bhuntar bihar bike tour birds birds wathing blogging tips blogs Brahma temple bridge bridge camera brijeshwari brijghat budhist bugyal camera canon x50 hs chamba Chandi Devi chandrshila char dham chardham yatra chaurasi temple chennai to rameshwaram cherapunji . photography childrens chintpurni chittod fort chittodgarh chopta coonnoor dadra and nager hewali dalhousie dalhousie to Khajjiar daman and deev dargah data teriff delhi to naina devi by road . 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